गुरुग्राम के DLF इलाके में मैराथन की तैयारी कर रहे रनर्स को कथित तौर पर बाउंसरों ने रोक दिया। रनर्स का आरोप है कि बाउंसरों ने सड़क को प्राइवेट बताते हुए उन्हें वहां दौड़ने से मना किया और धमकी भरे लहजे में बातचीत की। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रनर्स और बाउंसरों के बीच बहस होती दिखाई दे रही है।
रनर्स के अनुसार, वे मैराथन की तैयारी के लिए नियमित रूप से इस इलाके में दौड़ने आते हैं। इसी दौरान कुछ बाउंसरों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि बाउंसरों ने कहा कि यह प्राइवेट सड़क है और यहां रनिंग नहीं की जा सकती।
रनर्स का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आया कि सार्वजनिक आवाजाही वाली सड़क पर उन्हें किस आधार पर रोका जा रहा है। बातचीत के दौरान बाउंसरों ने कथित तौर पर कहा कि वे इन सड़कों को प्रोटेक्ट करते हैं। इस बात को लेकर रनर्स और बाउंसरों के बीच बहस बढ़ गई।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और विवाद की स्थिति दिखाई दे रही है। रनर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें डराने और वहां से हटाने की कोशिश की गई।
रनिंग करने वाले लोगों का कहना है कि वे किसी निजी संपत्ति में प्रवेश नहीं कर रहे थे, बल्कि सड़क पर मैराथन की तैयारी कर रहे थे। उनका दावा है कि नियमित रूप से कई लोग इस क्षेत्र में सुबह के समय रनिंग और वॉकिंग करते हैं।
दूसरी ओर, बाउंसरों की ओर से सड़क और इलाके की सुरक्षा का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना था कि वे इन सड़कों की सुरक्षा और निगरानी का काम करते हैं।
मामले ने निजी सुरक्षा कर्मियों के अधिकार और सार्वजनिक रास्तों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी व्यक्ति या सुरक्षा कर्मी द्वारा सार्वजनिक स्थान पर लोगों को रोकने का अधिकार किन परिस्थितियों में है, यह संबंधित नियमों और सड़क की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करता है।
रनर्स ने प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सड़क सार्वजनिक उपयोग के लिए है तो वहां दौड़ने या पैदल चलने वाले लोगों को बिना उचित कारण नहीं रोका जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था का समर्थन किया, जबकि अन्य ने रनर्स को रोकने के तरीके पर सवाल उठाए।
फिलहाल इस पूरे विवाद में संबंधित पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। सड़क का स्वामित्व, वहां लागू नियम और बाउंसरों को दी गई जिम्मेदारी की जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
मैराथन की तैयारी कर रहे रनर्स के लिए भी यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। उनका कहना है कि वे भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन और संबंधित प्राधिकरण से स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।
पुलिस या स्थानीय प्रशासन की ओर से मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई या बयान सामने आने के बाद विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल रनर्स को रोके जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
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