रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध सामने आया है। छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए यूनिवर्सिटी परिसर में एक अनोखा पोस्टर लगाया, जिसमें कुलपति की तस्वीर को कार्टून के रूप में दिखाया गया। पोस्टर के जरिए छात्रों ने फीस बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए।
छात्रों ने पोस्टर में व्यंग्यात्मक अंदाज में फीस नहीं बढ़ाने की अपील की। पोस्टर पर लिखे संदेश के जरिए छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। इस विरोध को लेकर कैंपस में छात्रों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
छात्रों का कहना है कि लगातार बढ़ती फीस का सीधा असर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर पड़ता है। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा पहले ही महंगी हो रही है और फीस में अतिरिक्त बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
विरोध के दौरान छात्रों ने कुलपति की फोटो का कार्टून बनाकर अपनी नाराजगी जताई। छात्रों का यह तरीका सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
मामले की जानकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन तक पहुंचने के बाद पोस्टर को हटाने के लिए कहा गया। प्रशासन की ओर से छात्रों से परिसर में लगाए गए पोस्टर हटाने को कहा गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि कैंपस में पोस्टर और अन्य सामग्री लगाने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। प्रशासन ने छात्रों को नियमों के अनुसार अपनी शिकायत और मांग रखने की बात कही है।
वहीं, छात्र फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि फीस में बदलाव से पहले विद्यार्थियों की समस्याओं और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
छात्र संगठनों की ओर से भी फीस वृद्धि के मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जा सकती है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मामले पर चर्चा करनी चाहिए।
फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद होता है तो फीस से जुड़े मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है।
छात्रों ने यह भी कहा कि वे अपनी मांग लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य फीस बढ़ोतरी के फैसले पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।
पोस्टर हटाने के निर्देश के बाद कैंपस में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। छात्र अब आगे किस तरह अपना विरोध दर्ज कराएंगे, इस पर भी नजर बनी हुई है।
विश्वविद्यालय में फीस, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक खर्चों से जुड़े फैसले छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। फीस बढ़ने पर विद्यार्थियों के कुल शिक्षा खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है। छात्र अपनी मांग और आपत्तियां प्रशासन के सामने रख सकते हैं, जबकि विश्वविद्यालय फीस निर्धारण के पीछे के कारण स्पष्ट कर सकता है।
फिलहाल MDU में फीस बढ़ोतरी के विरोध में लगाए गए पोस्टर को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों द्वारा कुलपति की तस्वीर का कार्टून बनाकर विरोध जताने का मामला कैंपस में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब देखना होगा कि फीस वृद्धि को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी समाधान तक पहुंचते हैं।
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