गुरुग्राम प्लॉट बिक्री केस में रोशनी बिश्नोई को झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज; घर पर नोटिस चस्पा

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Roshni Bishnoi

गुरुग्राम में मृत व्यक्तियों के नाम से जुड़े प्लॉट कथित तौर पर बेचने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी रोशनी बिश्नोई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद पुलिस ने उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा किया है। आरोप है कि मृत हो चुके लोगों से संबंधित प्लॉट की खरीद-बिक्री में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों या गलत प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।

मामला गुरुग्राम में स्थित जमीन और प्लॉट की खरीद-बिक्री से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच के दौरान कुछ ऐसे प्लॉट के लेनदेन पर सवाल उठे, जिनके मूल मालिकों की मृत्यु हो चुकी थी।

आरोप है कि मृत व्यक्तियों के प्लॉट को कथित तौर पर दस्तावेजी प्रक्रिया के जरिए दूसरे लोगों के नाम बेच दिया गया। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

जांच के दौरान जमीन के पुराने रिकॉर्ड, रजिस्ट्री और अन्य संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संपत्तियों का वास्तविक मालिक कौन था और बिक्री का अधिकार किसके पास था।

मामले में रोशनी बिश्नोई का नाम सामने आने के बाद उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आई। गिरफ्तारी की आशंका के बीच उनकी ओर से अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया।

अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों और पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। इसी क्रम में उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नोटिस के जरिए संबंधित व्यक्ति को जांच या कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा जा सकता है। नोटिस में दी गई शर्तें और समय सीमा ही आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगी।

पुलिस मामले में संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर सकती है। रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड से दस्तावेजों का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।

जिन लोगों के नाम मूल रूप से प्लॉट दर्ज थे, उनकी मृत्यु की तारीख और उसके बाद संपत्ति के स्वामित्व में हुए बदलाव की टाइमलाइन तैयार की जा सकती है।

यदि मृत व्यक्ति की संपत्ति बेची गई है तो पुलिस यह जांचेगी कि बिक्री के समय वैध उत्तराधिकारी कौन थे और उनकी अनुमति या अधिकार से संबंधित दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।

किसी पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल हुआ है तो उसकी वैधता भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

हस्ताक्षर, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य रिकॉर्ड संदिग्ध पाए जाने पर उनकी फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।

पुलिस यह भी पता लगा सकती है कि कथित प्लॉट बिक्री से किस व्यक्ति को आर्थिक लाभ हुआ और भुगतान किस माध्यम से किया गया।

बैंकिंग लेनदेन उपलब्ध होने पर रकम किस खाते से निकली और किस खाते में पहुंची, इसका रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

मामले में किसी प्रॉपर्टी डीलर, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उससे भी पूछताछ की जा सकती है।

जांच का दायरा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि मामला केवल कुछ प्लॉट तक सीमित है या इसी तरह के अन्य संपत्ति लेनदेन भी हुए हैं।

पुलिस संबंधित खरीदारों से भी पूछताछ कर सकती है। इससे यह पता चलेगा कि उन्हें प्लॉट किसने दिखाया, सौदा किसके माध्यम से हुआ और दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए।

रोशनी बिश्नोई पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।

फिलहाल गुरुग्राम में मृत व्यक्तियों के प्लॉट कथित तौर पर बेचने से जुड़े मामले में रोशनी बिश्नोई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और घर के बाहर नोटिस चस्पा किए जाने के बाद मामला फिर चर्चा में है। पुलिस दस्तावेजों, संपत्ति रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

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