रोहतक : आर्य समाज बोहर की ओर से रविवार को नांदल भवन में ‘पाखंड खंडन गोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आर्य समाज से जुड़े प्रतिनिधि और विद्वान शामिल होंगे। गोष्ठी में समाज में कथित पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान को लेकर चर्चा की जाएगी। साथ ही रामपाल से जुड़े विभिन्न दावों और विचारों का विरोध करते हुए आगे अभियान चलाने की घोषणा किए जाने की बात कही गई है।
आर्य समाज बोहर के सदस्य कृष्णदेव शास्त्री ने बताया कि पाखंड के खिलाफ अभियान की शुरुआत की जा चुकी है। उनके मुताबिक सम्मेलन में इस बात पर मंथन किया जाएगा कि समाज में अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
शास्त्री का कहना है कि समाज में अंधविश्वास बढ़ने से विशेष रूप से युवा पीढ़ी प्रभावित हो सकती है। युवाओं को भ्रम और कुरीतियों से बचाने के लिए वैचारिक जागरूकता जरूरी है। इसी उद्देश्य से विभिन्न आर्य समाज प्रतिनिधियों को एक मंच पर बुलाया गया है।
कार्यक्रम के दौरान रामपाल को लेकर भी चर्चा प्रस्तावित है। आयोजकों का कहना है कि वे रामपाल से जुड़े धार्मिक और सामाजिक दावों का वैचारिक स्तर पर विरोध करते हैं और लोगों के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इसके साथ भविष्य में चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान की रूपरेखा भी तय की जा सकती है।
कृष्णदेव शास्त्री ने रामपाल के पूर्व अनुयायी बताए जाने वाले कृष्णदास का भी जिक्र किया। शास्त्री के अनुसार कृष्णदास और रामपाल के बीच वर्ष 2006 के आसपास विवाद हुआ था, जिसके बाद कृष्णदास ने उनसे दूरी बना ली थी। उन्होंने दावा किया कि बाद में कृष्णदास ने रामपाल को लेकर ‘शैतान बना भगवान’ नाम से एक पुस्तक लिखी थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
शास्त्री ने रामपाल और उनसे जुड़े संस्थानों की आर्थिक गतिविधियों को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बड़ी मात्रा में आने वाले धन और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में आयोजकों की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की जानकारी नहीं दी गई है।
आर्य समाज बोहर के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को अपने विचारों के माध्यम से जागरूक करना है। शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज लंबे समय से अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करता रहा है और यह अभियान भी इसी दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था के प्रभाव में आने से पहले लोगों को तथ्यों को समझना और विचार करना चाहिए। विशेष रूप से युवा पीढ़ी में तार्किक सोच और सही संस्कार विकसित करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
शास्त्री के मुताबिक केवल किसी एक व्यक्ति का विरोध करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। समाज में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने के लिए प्रेरित करना अधिक जरूरी है। इसी विषय पर गोष्ठी में शामिल प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।
इससे पहले भी आर्य समाज से जुड़े संगठनों की ओर से पाखंड और अंधविश्वास के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। अब बोहर में होने वाली गोष्ठी के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
आयोजकों के अनुसार नांदल भवन में होने वाली गोष्ठी में चर्चा के बाद भविष्य के कार्यक्रमों और जागरूकता अभियान को लेकर निर्णय लिया जाएगा। रामपाल को लेकर लगाए गए आरोप और टिप्पणियां आर्य समाज बोहर के प्रतिनिधियों का पक्ष हैं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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