करनाल : सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद 30 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाने और समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि महिला की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
मृतका की पहचान 30 वर्षीय मनिका के रूप में हुई है। उसकी शादी करीब नौ साल पहले कुंजपुरा थाना क्षेत्र के गांव कुंडाकलां निवासी बजिंदर के साथ हुई थी। मनिका मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली थी।
मृतका के ससुर गोविंद सिंह ने बताया कि मनिका गर्भवती थी। डिलीवरी का समय नजदीक आने पर 12 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे उसे कुंजपुरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां प्राथमिक जांच और उपचार के बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे उसे करनाल के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
परिवार के अनुसार करनाल के अस्पताल में शाम करीब साढ़े 5 बजे ऑपरेशन के जरिए मनिका ने बेटी को जन्म दिया। उसकी पहले से करीब चार साल की एक बेटी है। दूसरी बेटी के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ समय बाद मनिका की तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों का कहना है कि रात करीब साढ़े 8 बजे मनिका को ICU में भर्ती किया गया। वहां उसका उपचार शुरू किया गया। कुछ समय बाद उसकी स्थिति में कुछ सुधार महसूस हुआ, लेकिन बाद में फिर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी सामने आई।
गोविंद सिंह के मुताबिक मनिका का गला काफी सूख रहा था और उसे थोड़ी मात्रा में पानी दिया गया। इसके बाद जांच के लिए उसका ब्लड सैंपल लिया गया और लैब भेजा गया।
परिवार का दावा है कि रात करीब 3 बजे मनिका को खून चढ़ाना शुरू किया गया। गोविंद सिंह का आरोप है कि ब्लड चढ़ने के करीब पांच से सात मिनट बाद ही मनिका को तेज खुजली और बेचैनी होने लगी। उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल में मौजूद नर्सिंग स्टाफ से तत्काल डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा। परिवार का आरोप है कि डॉक्टर काफी देर बाद मौके पर पहुंचे और तब तक मनिका की मौत हो चुकी थी।
मृतका के ससुर ने आरोप लगाया है कि मनिका को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया गया था। उन्होंने ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय डॉक्टर की मौजूदगी और मरीज की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी फिलहाल चिकित्सकीय जांच का विषय है कि मनिका की तबीयत ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़ी किसी प्रतिक्रिया के कारण बिगड़ी या इसके पीछे डिलीवरी, ऑपरेशन अथवा कोई अन्य मेडिकल कारण था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, ब्लड बैंक रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट और उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए करनाल की मोर्चरी भेजा। रविवार को पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस फिलहाल परिजनों के आरोपों के साथ मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने से पहले अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही या गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाए जाने को मौत का कारण मानना संभव नहीं है।
अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अस्पताल से मिलने वाले रिकॉर्ड इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे। इनके आधार पर ही महिला की मौत के वास्तविक कारण और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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