हरियाणा : देश की अलग-अलग जेलों में सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) का धरना जारी है। कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जबकि संगत की ओर से भी समर्थन मिल रहा है। HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने इस मुद्दे पर आंदोलन को और तेज करने की बात कही है।
झींडा के चंडीगढ़ में प्रस्तावित बैठक से पहले धरनास्थल पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। उन्होंने बंदी सिखों की रिहाई के मुद्दे पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सजा पूरी कर चुके कई बंदियों की रिहाई नहीं हो रही है।
झींडा ने कहा कि देश की अलग-अलग जेलों में ऐसे सिख बंदी हैं, जो अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी रिहाई नहीं होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने इसे सिख समुदाय की प्रमुख मांग बताते हुए सरकार से इस विषय पर फैसला लेने की मांग की।
हालांकि किन-किन बंदियों की सजा पूरी हो चुकी है, उनकी रिहाई की कानूनी स्थिति क्या है और किन मामलों में अन्य न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रियाएं लंबित हैं, यह प्रत्येक मामले के रिकॉर्ड और संबंधित सरकारों के निर्णय पर निर्भर करता है।
जत्थेदार झींडा ने कहा कि बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मोहाली में हुई एक बैठक के दौरान कौमी इंसाफ मोर्चा के समक्ष जेल भरो आंदोलन शुरू करने का सुझाव रखा गया था।
उनके मुताबिक प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के जरिए सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाने का प्रयास किया जाएगा। झींडा ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत पंजाब से करने की योजना है और इसके बाद इसे आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शुरू किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार के सामने बंदी सिखों की रिहाई की मांग मजबूती से रखी जा सके। उनके अनुसार यह किसी एक व्यक्ति या संस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सजा पूरी कर चुके बताए जा रहे बंदियों के अधिकार और न्याय से जुड़ा विषय है।
HSGMC प्रधान ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए 2 अक्टूबर को रोष मार्च निकालने की घोषणा भी की। उनके अनुसार रोष मार्च की शुरुआत ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब से की जाएगी।
प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक मार्च पहले दिन गुरुद्वारा श्री मस्तू आना साहिब पहुंचेगा और यहां रात्रि ठहराव होगा। अगले दिन मार्च तख्त श्री दमदमा साहिब पहुंचेगा, जहां इसका समापन किया जाएगा।
झींडा ने बताया कि तख्त श्री दमदमा साहिब पहुंचने के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इसमें बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर भविष्य में किए जाने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती है।
उन्होंने सिख समाज से इस मुद्दे पर एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठाने का आह्वान किया। झींडा ने कहा कि आपदा और संकट के समय सिख समाज हमेशा सेवा कार्यों में आगे रहा है और स्वतंत्रता आंदोलन में भी सिख समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
धरने में शामिल संगत हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर बंदी सिखों की रिहाई की मांग उठा रही है। कमेटी का कहना है कि मांग पर ठोस कार्रवाई होने तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
फिलहाल HSGMC की ओर से सरकार पर लगाए गए आरोपों और बंदियों की कानूनी स्थिति को लेकर सरकार का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। बंदियों की रिहाई का अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रावधानों, न्यायिक आदेशों और सक्षम सरकार अथवा प्राधिकरण की प्रक्रिया के आधार पर होगा।
![]()











