हरियाणा : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री स्तर पर प्रस्तावित समीक्षा बैठक से पहले हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के राज्य परियोजना निदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अतिरिक्त उपायुक्तों (ADC), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) के साथ बैठक कर लंबित कार्यों की समीक्षा की।
बैठक में सरकारी स्कूलों के असुरक्षित भवन, जलभराव, पौधरोपण अभियान, मॉडल बाल-वाटिका और अनुपयोगी आईटी उपकरणों के निपटारे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही और उपलब्ध बजट का समय पर इस्तेमाल नहीं करने के मामलों में जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई।
सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी स्कूलों में असुरक्षित घोषित किए गए भवनों का सामने आया। प्रदेश में 2,814 स्कूल भवन या उनके हिस्से असुरक्षित श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। इनमें कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पूरी इमारत के बजाय एक या दो कमरे ध्वस्त किए जाने हैं।
सभी ADC को निर्देश दिए गए हैं कि असुरक्षित भवनों का सत्यापन, उन्हें नियमानुसार कंडम घोषित करने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक पूरी कराई जाए। रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने पर संबंधित जिलों को डेटा ठीक कर अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। असुरक्षित कमरों या भवनों का इस्तेमाल रोकने के साथ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत तेजी से पूरी करने पर जोर दिया गया है।
बैठक में सरकारी स्कूलों में जलभराव की समस्या भी सामने आई। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 647 स्कूलों में मौसमी जलभराव होता है, जबकि 53 स्कूल ऐसे हैं जहां स्थायी रूप से पानी भरने की समस्या बताई गई है। इस तरह करीब 700 स्कूल जलभराव से प्रभावित हैं।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि उपलब्ध VB-GRAM G फंड का उपयोग मिट्टी भराव के लिए स्वतंत्र रूप से करना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें मुख्य रूप से मजदूरी का प्रावधान है और आवश्यक सामग्री के खर्च की व्यवस्था नहीं है।
इस पर जलभराव रोकने के लिए जरूरत के मुताबिक पैरापेट या रिटेनिंग वॉल बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही DEO और DEEO को मिट्टी भराव में लगने वाली सामग्री के लिए नया बजट एस्टिमेट तैयार कर DGSE/DEE को भेजने को कहा गया है, ताकि सरकार से अलग बजट की मंजूरी ली जा सके।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। हरियाणा को 12.50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है, जिसके मुकाबले करीब 8.25 लाख पौधे लगाए जाने की जानकारी बैठक में दी गई। अभियान से संबंधित संपूर्ण रिपोर्ट 30 सितंबर तक केंद्र के संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश हैं।
अंबाला जिले ने अपने निर्धारित लक्ष्य का 119 प्रतिशत काम पूरा करने की जानकारी दी, जिस पर बैठक में जिले के प्रदर्शन की सराहना की गई। दूसरी तरफ फरीदाबाद में लक्ष्य का करीब 3 प्रतिशत और पलवल में करीब 8 प्रतिशत काम होने की बात सामने आई। दोनों जिलों के अधिकारियों को अभियान की गति तत्काल बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
प्री-प्राइमरी शिक्षा से जुड़े मॉडल बाल-वाटिका प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई गई। सरकार की ओर से प्रत्येक जिले में एक मॉडल बाल-वाटिका तैयार करने के लिए पांच लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के करीब एक महीने बाद भी कई स्थानों पर काम शुरू नहीं होने का मुद्दा बैठक में उठा।
अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि शुरुआती चरण में प्रत्येक जिले में एक मॉडल बाल-वाटिका बनाई जानी है। इनका काम शुरू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर बाल-वाटिका विकसित करने के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। ADC को मौजूदा प्रोजेक्ट पर तुरंत काम शुरू कराने को कहा गया है।
सरकारी स्कूलों में लंबे समय से बेकार पड़े कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य अनुपयोगी आईटी उपकरणों के निपटारे पर भी चर्चा हुई। इन्हें हरियाणा स्टेट आईटी पॉलिसी के प्रावधानों के तहत निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कुछ आईटी उपकरण मुकदमेबाजी या AMC जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे उपकरणों की सही पहचान के लिए फोटो और अन्य विवरण की आवश्यकता है। HSSPP का आईटी सेल संबंधित उपकरणों की तस्वीरें और विस्तृत जानकारी जिलों को उपलब्ध कराएगा।
शिक्षा विभाग की इस समीक्षा में स्कूल भवनों की सुरक्षा और जलभराव जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने के संकेत मिले हैं। अब जिलों के अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित कार्य पूरे करने होंगे। समय पर कार्रवाई नहीं होने या बजट के उपयोग में अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
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