शहर के दवा कारोबारियों और मेडिकल स्टोर संचालकों ने ऑनलाइन दवा कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता जाहिर की है। स्थानीय केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्राहकों को 25 से 30 प्रतिशत तक की भारी छूट दे रहे हैं, जबकि छोटे मेडिकल स्टोर अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही डिस्काउंट देने में सक्षम हैं। इससे पारंपरिक दवा कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।
केमिस्टों का कहना है कि स्थानीय दुकानदार सीमित मुनाफे पर काम करते हैं और उन्हें किराया, बिजली, स्टाफ वेतन तथा अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में बड़ी ऑनलाइन कंपनियों की तरह भारी छूट देना उनके लिए संभव नहीं है। कारोबारियों के अनुसार ग्राहक अब अधिक बचत के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जिससे दुकानों की बिक्री लगातार घट रही है।
दवा विक्रेताओं ने यह भी कहा कि स्थानीय मेडिकल स्टोर केवल दवाइयां बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सुविधा उपलब्ध कराते हैं। कई बार मरीजों को उधार में दवाइयां भी दी जाती हैं, जबकि ऑनलाइन सेवाओं में ऐसा संभव नहीं होता। इसके बावजूद ऑनलाइन कंपनियों के बड़े ऑफर छोटे कारोबारियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
केमिस्ट एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों ने सरकार से इस मामले में संतुलित नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह ऑनलाइन कंपनियों को खुली छूट मिलती रही तो छोटे मेडिकल स्टोरों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने यह भी मांग की कि दवा बिक्री में एक समान नियम लागू किए जाएं ताकि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और छोटे कारोबारियों के हित सुरक्षित रह सकें।
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