साइबर ठगों का हाई-प्रोफाइल जाल, वरिष्ठ एजेंसी का डर दिखाकर बड़ी रकम ऐंठी

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नकली जांच का खौफ, वर्चुअल कैद में रखकर की गई करोड़ों की ठगी

देश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शातिर अपराधियों ने खुद को एक केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताकर एक दंपती को अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों से बड़ी धनराशि ट्रांसफर करवा ली।

पीड़ितों को बताया गया कि उनके नाम से संदिग्ध लेन-देन हुआ है और वे एक गंभीर आर्थिक अपराध की जांच के दायरे में हैं। इसके बाद उन्हें लगातार ऑनलाइन संपर्क में रखा गया और हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया। मानसिक दबाव इतना अधिक था कि पीड़ितों को किसी से संपर्क करने या सलाह लेने का मौका तक नहीं दिया गया। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि थोड़ी सी चूक भी उन्हें बड़े कानूनी संकट में डाल सकती है।

दो दिनों तक इस तथाकथित जांच प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों को लगातार निर्देश दिए जाते रहे। कॉल और वीडियो संपर्क के जरिए यह दिखाया गया कि पूरा मामला आधिकारिक है और हर कदम रिकॉर्ड किया जा रहा है। डर और भ्रम के माहौल में पीड़ितों ने अपनी जमा पूंजी ठगों के बताए खातों में भेज दी। जब लंबे समय बाद उन्हें शक हुआ और संपर्क टूटने लगा, तब जाकर ठगी का एहसास हुआ।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठगों ने तकनीकी साधनों और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर इस अपराध को अंजाम दिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी अनजान कॉल पर निजी या वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

यह मामला एक कड़ी चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में अपराधी भरोसे और डर दोनों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। जागरूकता और समय पर सही सूचना ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

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