हरियाणा में आज 3 जिलों में बूंदाबांदी की संभावना, अगस्त में सामान्य से 14% ज्यादा बरसे बादल

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Haryana Weather

हरियाणा में मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। प्रदेश के तीन जिलों में आज कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की बारिश होने की संभावना है। अगस्त में अब तक राज्य में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि बारिश का वितरण एक समान नहीं रहने के कारण प्रदेश के सात जिलों में अपेक्षाकृत कम वर्षा से सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

प्रदेश में पिछले दिनों कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई थी। गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत सहित कुछ जिलों में तेज बारिश के बाद जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

अब मानसूनी गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने से अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना कम हुई है। कुछ चुनिंदा जिलों में ही स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

मौसम में बदलाव के साथ तापमान और उमस में भी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। बारिश नहीं होने वाले क्षेत्रों में दिन के समय गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है।

अगस्त के दौरान पूरे हरियाणा के औसत आंकड़े को देखें तो सामान्य के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी है।

हालांकि प्रदेश स्तर पर सामान्य से अधिक बारिश का आंकड़ा सभी जिलों की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शाता। कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज की गई है।

इसी असमान वितरण के कारण सात जिलों में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। कृषि क्षेत्र के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर हुई वर्षा ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

कम बारिश वाले क्षेत्रों में खेतों की नमी और सिंचाई की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। खासकर ऐसी फसलों में किसानों को अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है, जिन्हें लगातार पर्याप्त नमी चाहिए।

दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में पिछले दिनों अच्छी बारिश हुई है, वहां किसानों को खेत में पानी की वास्तविक स्थिति देखकर ही सिंचाई करने की सलाह दी जाती है।

अधिक पानी जमा होने की स्थिति में फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

मानसून के दौरान केवल कुल बारिश ही नहीं, बल्कि बारिश का समय और उसका वितरण भी फसल उत्पादन पर असर डालता है।

एक साथ बहुत अधिक बारिश होने के बाद लंबे समय तक सूखा मौसम रहने से फसलों को उतना फायदा नहीं मिलता जितना नियमित अंतराल पर होने वाली बारिश से मिलता है।

धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसल के लिए पर्याप्त नमी जरूरी है। वहीं कपास में अधिक नमी और उमस के कारण कुछ कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही सिंचाई, खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल का फैसला करने की सलाह दी जा रही है।

हल्की बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में कीटनाशक या अन्य रसायनों का छिड़काव करने से पहले मौसम की स्थिति देखना जरूरी है। बारिश होने पर छिड़काव का असर कम हो सकता है।

प्रदेश में मानसून सीजन के शेष दिनों की बारिश अब कम वर्षा वाले जिलों के लिए महत्वपूर्ण होगी। यदि वहां पर्याप्त बारिश होती है तो वर्षा की कमी में सुधार हो सकता है।

वहीं लगातार कमजोर मानसून रहने की स्थिति में किसानों की सिंचाई पर निर्भरता बढ़ सकती है। इससे नलकूप और नहरी पानी की मांग भी बढ़ेगी।

मौसम विभाग और कृषि मौसम विशेषज्ञों के आगामी पूर्वानुमान पर किसानों की नजर बनी हुई है। मानसून की दिशा में बदलाव होने पर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां दोबारा बढ़ सकती हैं।

फिलहाल हरियाणा में मानसून की गतिविधियां सीमित रहने के आसार हैं। तीन जिलों में बूंदाबांदी की संभावना के बीच अगस्त में प्रदेश का औसत बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 14 प्रतिशत अधिक है, लेकिन सात जिलों में कम वर्षा की स्थिति चिंता बढ़ा रही है।

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