कुरुक्षेत्र मामले में आरोपी पत्नी की मानसिक स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी, PGI से वापस अस्पताल भेजा; मेडिकल बोर्ड करेगा अगला फैसला

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Kurukshetra Case

कुरुक्षेत्र के चर्चित मामले में आरोपी पत्नी की मानसिक और चिकित्सकीय स्थिति को लेकर जांच जारी है। डॉक्टरों ने महिला के व्यवहार को देखते हुए विशेष निगरानी की जरूरत बताई है। उसे जांच और इलाज के लिए PGI ले जाया गया था, लेकिन वहां भर्ती नहीं किए जाने के बाद वापस कुरुक्षेत्र के अस्पताल लाया गया। अब मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय किए जाने की बात सामने आई है।

महिला अपने पति की मौत से जुड़े मामले में आरोपी है। इस प्रकरण में शव के साथ कथित तौर पर गंभीर छेड़छाड़ किए जाने के आरोप भी सामने आए थे। हालांकि घटना के वास्तविक कारण, महिला की भूमिका और उसके व्यवहार से जुड़े तथ्यों की जांच पुलिस तथा चिकित्सा विशेषज्ञों के स्तर पर की जा रही है।

महिला की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठने के बाद उसे विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन के लिए PGI भेजा गया था।

बताया जा रहा है कि वहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति का प्रारंभिक आकलन किया, लेकिन उसे भर्ती कर इलाज शुरू नहीं किया गया। इसके बाद महिला को वापस कुरुक्षेत्र के अस्पताल लाया गया।

महिला के व्यवहार को देखते हुए चिकित्सकों द्वारा अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई है।

किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय रूप से मानसिक बीमारी या किसी विशेष विकार से पीड़ित घोषित करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है। केवल असामान्य या आक्रामक व्यवहार के आधार पर किसी मानसिक बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

यही वजह है कि अब मेडिकल बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

मेडिकल बोर्ड महिला की वर्तमान स्थिति, पहले की मेडिकल हिस्ट्री, व्यवहार और आवश्यक जांचों का आकलन कर सकता है। इसके बाद यह फैसला लिया जाएगा कि उसे किस तरह की चिकित्सा निगरानी या विशेषज्ञ उपचार की जरूरत है।

मामला आपराधिक जांच से भी जुड़ा होने के कारण महिला की मानसिक स्थिति का चिकित्सकीय मूल्यांकन कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है।

पुलिस के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि घटना के समय आरोपी महिला की मानसिक स्थिति क्या थी और उसके द्वारा दिए गए बयानों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से होती है या नहीं।

इस मामले में पहले महिला की ओर से पति द्वारा जहरीला पदार्थ खाने से संबंधित दावा किए जाने की बात सामने आई थी। दूसरी ओर डॉक्टरों ने शव से दिल निकालने जैसी कुछ चर्चाओं को नकारा था।

ऐसे में पुलिस जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और मेडिकल विशेषज्ञों की राय सबसे महत्वपूर्ण आधार होंगे।

महिला द्वारा दिए गए किसी भी बयान को स्वतंत्र रूप से अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। उसकी पुष्टि वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुलिस जांच के जरिए होना जरूरी है।

अस्पताल प्रशासन के सामने महिला की सुरक्षा के साथ डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है।

यदि मेडिकल बोर्ड को लगता है कि महिला को विशेष मनोचिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है तो उसे उपयुक्त चिकित्सा संस्थान में भेजने पर फैसला लिया जा सकता है।

वहीं यदि किसी तरह की तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पाई जाती तो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल आरोपी महिला को PGI से वापस कुरुक्षेत्र के अस्पताल लाया गया है। उसकी मानसिक और चिकित्सकीय स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद ही निकलेगा। मेडिकल बोर्ड की आगामी राय यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि महिला को आगे कहां और किस प्रकार की चिकित्सा निगरानी या उपचार दिया जाए।

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