राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लागू की जा रही नई स्क्रैपेज पॉलिसी का हरियाणा पर व्यापक असर पड़ने वाला है। इस नीति के तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जाएगा। विशेष रूप से पुराने ट्रक, बसें और अन्य व्यावसायिक वाहन इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। सरकार का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।
नई नीति के अनुसार पुराने वाहनों को एक साथ हटाने के बजाय चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे वाहन मालिकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को नए नियमों के अनुरूप खुद को ढालने का समय मिल सकेगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी और परिवहन क्षेत्र पर अचानक बोझ नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा के कई जिलों में बड़ी संख्या में पुराने व्यावसायिक वाहन संचालित हो रहे हैं। नई स्क्रैपेज पॉलिसी लागू होने के बाद ऐसे वाहनों के संचालन पर असर पड़ सकता है। इससे वाहन मालिकों को नए और पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की ओर रुख करना पड़ेगा।
सरकार स्वच्छ तकनीक वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं पर भी काम कर रही है। नई पीढ़ी के BS-VI मानक वाले वाहन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने वाले वाहन मालिकों को कुछ वित्तीय लाभ और सब्सिडी मिलने की संभावना है। इससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि नीति का उद्देश्य सकारात्मक है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक होंगे। छोटे ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों को नए वाहन खरीदने में आर्थिक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने वाहनों को हटाने से वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और ईंधन दक्षता भी बढ़ेगी। इसके अलावा सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी नए वाहनों का उपयोग अधिक लाभकारी माना जाता है।
फिलहाल नई स्क्रैपेज पॉलिसी को लेकर परिवहन क्षेत्र, वाहन मालिकों और आम लोगों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले समय में इसके विस्तृत दिशा-निर्देश और लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद स्थिति और साफ हो सकेगी।
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