नूंह। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए स्थापित फेशियल बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का नियमित इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य हाजिरी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
नूंह के उपायुक्त की ओर से भेजे गए पत्र के बाद निदेशालय ने आदेश जारी किए। जिला प्रशासन स्कूलों में चेहरे की पहचान से हाजिरी दर्ज करने वाली डिवाइस पहले ही लगवा चुका है। अब इनके नियमित उपयोग के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थापित व्यवस्था के जरिए उपस्थिति दर्ज की जा सके।
जिले के दूर-दराज के स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और देर से आने-जाने की शिकायतें प्रशासन के पास आती रही हैं। कागजी रजिस्टर में हाजिरी दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आई थीं। डिजिटल व्यवस्था से उपस्थिति और समय का रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे निगरानी तथा जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नूंह नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम में शामिल है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में सुधार पर ध्यान दिया जाता है। स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की पहल को शिक्षा की स्थिति बेहतर करने के प्रयासों से जोड़ा गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षकों और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति से पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे बच्चों के सीखने के स्तर और शैक्षणिक परिणामों में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
निदेशालय के निर्देशों के बाद स्कूलों में पहले से स्थापित उपकरणों का नियमित इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा। नई व्यवस्था के माध्यम से हाजिरी का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित बनाने और उपस्थिति संबंधी शिकायतों की निगरानी करने पर जोर दिया गया है।
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