पंचकूला में कुत्ते के हमले का एक और मामला सामने आया है। घर के गेट पर खड़े सात वर्षीय बच्चे को कुत्ते ने काट लिया। अचानक हुए हमले से बच्चा घबरा गया। घटना के बाद परिवार और आसपास रहने वाले लोगों में रोष है और क्षेत्र में कुत्तों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार सात वर्षीय बच्चा अपने घर के गेट के पास खड़ा था। इसी दौरान वहां मौजूद कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बच्चे के शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोगों और परिवार के सदस्यों का ध्यान घटना की तरफ गया।
हमले के बाद बच्चे को तुरंत संभाला गया और उपचार के लिए ले जाया गया। कुत्ते के काटने की घटना के बाद परिवार के लोग बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
घटना की जानकारी आसपास के लोगों को मिलने के बाद उनमें भी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों में कुत्तों के कारण बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से खतरा बना रहता है। घरों से बाहर निकलते समय भी लोगों को सतर्क रहना पड़ता है।
लोगों ने संबंधित विभाग और नगर निकाय से समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय कुत्तों के प्रबंधन के लिए नियमित और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
स्थानीय निवासियों ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे बच्चे खतरे को समय रहते समझ नहीं पाते और अचानक हमला होने पर खुद को बचाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।
कुत्तों से जुड़े मामलों में स्थानीय निकाय के लिए पशु कल्याण नियमों का पालन करते हुए नसबंदी, टीकाकरण और क्षेत्रवार निगरानी जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। साथ ही किसी आक्रामक या बीमार कुत्ते की सूचना मिलने पर संबंधित टीम द्वारा स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।
कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना और बिना देरी चिकित्सा केंद्र पहुंचना जरूरी है। डॉक्टर जोखिम का आकलन कर एंटी-रेबीज वैक्सीन तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य उपचार की सलाह देते हैं।
पंचकूला की इस घटना ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोग प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल बच्चे का उपचार कराया गया है। घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में गुस्सा है और वे संबंधित अधिकारियों से कुत्तों के प्रबंधन तथा रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
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