गलत जानकारी देकर छात्र को दाखिला देना संस्थान को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने फीस लौटाने के आदेश दिए

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Rewari News

रेवाड़ी में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक शिक्षण संस्थान को छात्र को गलत जानकारी देकर दाखिला देने के मामले में दोषी मानते हुए जुर्माना लगाया है। आयोग ने संस्थान को छात्र से ली गई फीस वापस करने के साथ उस पर ब्याज और अन्य निर्धारित राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

मामला एक छात्र के दाखिले से जुड़ा है। आरोप है कि संस्थान की ओर से छात्र को पाठ्यक्रम और उससे मिलने वाली सुविधाओं से संबंधित जानकारी दी गई थी। इसी जानकारी के आधार पर छात्र ने संस्थान में प्रवेश लिया और फीस जमा की।

बाद में छात्र को पता चला कि संस्थान की ओर से बताई गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर है। इसके बाद उसने संस्थान से अपनी फीस वापस करने की मांग की। छात्र के अनुसार, उसे दाखिले के समय पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई थी।

संस्थान से संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर छात्र ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। शिकायत में छात्र ने संस्थान की ओर से दी गई जानकारी, फीस भुगतान और बाद में सामने आई स्थिति का विवरण प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार किया। आयोग ने पाया कि छात्र को दाखिले के समय दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर था।

आयोग ने इसे छात्र के साथ अनुचित व्यवहार माना और संस्थान को जिम्मेदारी तय करते हुए आदेश जारी किए। आयोग ने कहा कि शिक्षण संस्थानों द्वारा दाखिले से पहले छात्रों को पाठ्यक्रम, मान्यता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

आयोग के आदेश के अनुसार संस्थान को छात्र से प्राप्त फीस वापस करनी होगी। इसके साथ ही निर्धारित अवधि के अनुसार ब्याज का भुगतान भी करना होगा।

इसके अलावा आयोग ने छात्र को हुई मानसिक परेशानी और मामले की प्रक्रिया में हुए खर्च को देखते हुए अतिरिक्त राशि देने के निर्देश भी दिए हैं। आदेश में भुगतान की शर्तें और समयसीमा निर्धारित की गई है।

इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दाखिला लेने से पहले किसी भी संस्थान द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।

छात्रों को पाठ्यक्रम की मान्यता, संस्थान की संबद्धता, फीस स्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी दस्तावेजों के आधार पर जांचनी चाहिए। केवल मौखिक जानकारी के आधार पर दाखिला लेने से बाद में विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

उपभोक्ता आयोग ने मामले में संस्थान को फीस लौटाने का निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि गलत या भ्रामक जानकारी के आधार पर छात्र से फीस लेना संस्थान के लिए कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है।

शिक्षण संस्थानों के लिए भी यह फैसला एक तरह की चेतावनी माना जा सकता है कि दाखिले के दौरान छात्रों को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

फीस वापसी के साथ ब्याज और अन्य राशि का भुगतान संस्थान को आयोग के आदेश के अनुसार करना होगा। यदि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है।

फिलहाल रेवाड़ी जिला उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के बाद छात्र को राहत मिली है। संस्थान को गलत जानकारी देकर कराए गए दाखिले के मामले में फीस ब्याज समेत लौटानी होगी।

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