अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों की फीस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपये की राशि को लेकर प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, लगभग 13.52 करोड़ रुपये की फीस राशि छात्रवृत्ति योजना के तहत जारी की गई थी, लेकिन यह रकम संबंधित विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों तक नहीं पहुंच पाई।
बताया जा रहा है कि छात्रवृत्ति की राशि छात्रों के खातों में पहुंच गई थी, जबकि नियमों के अनुसार इसका उपयोग फीस भुगतान के लिए किया जाना था। हालांकि कई मामलों में यह राशि संस्थानों तक जमा नहीं हुई, जिसके चलते फीस बकाया का मामला वर्षों तक लंबित रहा। इस स्थिति ने उच्च शिक्षा संस्थानों और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती पैदा कर दी है।
मामले की जांच में सामने आया है कि पिछले चार वर्षों के दौरान फीस वसूली और सत्यापन प्रक्रिया में बड़ी चूक हुई। समय पर निगरानी और समन्वय की कमी के कारण करोड़ों रुपये की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित नहीं हो सका। इससे संबंधित विश्वविद्यालयों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा और छात्रों की शैक्षणिक प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रवृत्ति योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा में सहायता प्रदान करना है। ऐसे में राशि के उपयोग और फीस भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बेहद जरूरी है। यदि समय पर समीक्षा की जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
अब संबंधित विभागों द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड का सत्यापन कर यह पता लगाया जाएगा कि राशि कहां और किस परिस्थिति में लंबित रह गई। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रक्रियाओं को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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