सोनीपत में स्कूल का गेट गिरने से छात्र की मौत के मामले में मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल असुरक्षित और जर्जर स्कूल भवनों की पहचान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर समयबद्ध तरीके से ठोस कार्रवाई भी जरूरी है। इस टिप्पणी के बाद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।
मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें स्कूल परिसर में गेट गिरने से एक छात्र की जान चली गई थी। हादसे ने स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया कि यदि किसी भवन या उसके हिस्से को पहले से असुरक्षित माना जाता है, तो उसे सुरक्षित करने या हटाने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।
मानव अधिकार आयोग ने अपने रुख में इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूलों में भवन, गेट, दीवार, छत और अन्य ढांचागत हिस्सों की नियमित जांच जरूरी है। केवल निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को निश्चित समयसीमा के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए।
आयोग की टिप्पणी के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन के स्तर पर स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। खासतौर पर पुराने और जर्जर भवनों की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी छात्र या कर्मचारी की जान खतरे में न पड़े।
इस हादसे में छात्र की मौत ने परिवार को गहरा सदमा दिया है। वहीं, घटना के बाद स्कूलों में सुरक्षा मानकों को लेकर अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी है। आयोग का संदेश स्पष्ट है कि सुरक्षा संबंधी खामियों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर सुधार करना जरूरी है।
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