ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा का संघर्ष: डिलीवरी के बाद 15 मीटर भी नहीं गया थ्रो, पति के साथ ने दिलाया कॉमनवेल्थ पदक

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Seema Athlete

कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली हरियाणा की डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा ने अपनी संघर्षभरी यात्रा साझा करते हुए बताया कि मां बनने के बाद उनके लिए खेल में वापसी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि डिलीवरी के बाद वह अपने बेटे को ठीक से गोद तक नहीं उठा पाती थीं और शारीरिक रूप से काफी कमजोर महसूस करती थीं।

सीमा ने बताया कि खेल में वापसी के शुरुआती दिनों में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि पहली बार अभ्यास के दौरान उनका डिस्कस थ्रो 15 मीटर तक भी नहीं पहुंचा। उस समय उन्हें लगा कि शायद वह दोबारा अपने पुराने स्तर पर नहीं लौट पाएंगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने पति को दिया। सीमा के अनुसार, उनके पति ने हर कठिन दौर में उनका मनोबल बढ़ाया और कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में पूरा सहयोग किया। प्रशिक्षण से लेकर मानसिक मजबूती तक हर कदम पर उन्होंने साथ दिया, जिससे वह धीरे-धीरे अपनी फिटनेस और प्रदर्शन में सुधार कर सकीं।

सीमा ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए परिवार का सहयोग सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने बताया कि लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी फॉर्म वापस हासिल की और आखिरकार कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

उन्होंने युवा खिलाड़ियों, खासकर महिला खिलाड़ियों और नई माताओं को संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रखी जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद भी खेलों में शानदार प्रदर्शन किया जा सकता है।

फिलहाल सीमा का लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करना है। वह भविष्य में एशियन गेम्स और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत के लिए और अधिक पदक जीतने की तैयारी में जुटी हुई हैं।

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