सोनीपत में स्वतंत्रता दिवस के चलते घोषित अवकाश के बावजूद कुछ निजी स्कूलों के खुले रहने का मामला सामने आया है। छुट्टी के आदेश जारी होने के बाद भी स्कूलों में गतिविधियां चलने से शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया था। इसके बावजूद जिले के कुछ निजी स्कूलों में विद्यार्थियों और स्टाफ की मौजूदगी देखी गई। इससे अभिभावकों में भी नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।
अभिभावकों का कहना है कि जब विभाग की ओर से छुट्टी के आदेश जारी किए गए थे तो सभी स्कूलों को उनका पालन करना चाहिए था। उनका सवाल है कि यदि किसी स्कूल ने आदेश का पालन नहीं किया तो संबंधित अधिकारियों की ओर से समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
स्कूल खुले होने की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विभाग के सामने अब यह चुनौती है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
स्वतंत्रता दिवस देश का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है। इस अवसर पर स्कूलों में पहले ही विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और सरकारी निर्देशों के अनुसार अवकाश भी निर्धारित किया जाता है। ऐसे में छुट्टी के आदेश के बावजूद स्कूल खुलने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बताया जा रहा है कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों को बुलाए जाने की सूचना अभिभावकों तक पहुंची। इसके बाद मामले को लेकर चर्चा तेज हुई। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
शिक्षा विभाग की निगरानी टीमों की भूमिका भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि स्कूलों को अवकाश के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, तो अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी शिक्षण संस्थान उनका पालन कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि छुट्टी के दिन बच्चों को स्कूल भेजने से उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। साथ ही यदि किसी राष्ट्रीय अवकाश के संबंध में विभागीय आदेश जारी हैं तो निजी शिक्षण संस्थानों को भी उनका पालन करना चाहिए।
वहीं, स्कूल प्रबंधन की ओर से अलग-अलग कारण बताए जा सकते हैं। किसी भी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई से पहले शिक्षा विभाग द्वारा वास्तविक स्थिति और स्कूल प्रबंधन का पक्ष जांचना जरूरी होगा।
फिलहाल इस मामले ने सोनीपत में शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों की नजर अब विभाग की कार्रवाई पर है।
यदि जांच में आदेशों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित निजी स्कूलों के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से भविष्य में ऐसे मामलों की निगरानी और सख्त करने की जरूरत भी सामने आई है।
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