हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से जुड़े मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अधिकारी और पंचायत विभाग से जुड़े एक कर्मचारी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। रिमांड अवधि के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
जांच एजेंसियों के अनुसार अधिकारी से जुड़े विभिन्न वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और संपत्ति दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। इसी क्रम में परिवार के नाम पर दर्ज व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां और कारोबार किन स्रोतों से स्थापित किए गए तथा उनकी वित्तीय संरचना क्या है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक इकाइयों से जुड़े दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा रही है। एजेंसियां इन संपत्तियों के स्वामित्व, निवेश और आय के स्रोतों का मिलान उपलब्ध रिकॉर्ड से कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सभी लेनदेन नियमानुसार घोषित किए गए थे या नहीं।
पंचायत विभाग से जुड़े कर्मचारी की भूमिका की भी अलग से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए उससे पूछताछ महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से दोनों से समानांतर रूप से सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।
हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच जारी है और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। फिलहाल इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है, क्योंकि जांच के नतीजे आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकते हैं।
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