हरियाणा में मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर पड़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सितंबर तक बारिश का दौर सीमित रहने की संभावना है। इसी बीच पंचकूला के मोरनी क्षेत्र में लैंडस्लाइड की घटना सामने आई, जिससे मलबा कालका-शिमला रेल ट्रैक तक पहुंच गया। दूसरी ओर, प्रदेश में तापमान बढ़ने से गर्मी का असर भी दोबारा महसूस किया जा रहा है और हिसार सबसे गर्म रहा।
मोरनी के पहाड़ी इलाके में बारिश के बाद मिट्टी और पत्थरों के खिसकने से मलबा नीचे आ गया। इसका कुछ हिस्सा कालका-शिमला रेल ट्रैक पर गिरने की जानकारी सामने आई है। रेलवे और संबंधित विभाग की टीमों को ट्रैक से मलबा हटाने के लिए काम करना पड़ सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान लैंडस्लाइड का खतरा बना रहता है। लगातार बारिश होने पर कमजोर ढलानों से मिट्टी और चट्टानें खिसक सकती हैं। हालांकि वर्तमान में बारिश की गतिविधि कमजोर होने के कारण बड़े स्तर पर जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति की संभावना कम बताई जा रही है।
हरियाणा के मैदानी इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदल रहा है। बारिश में कमी के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हिसार में प्रदेश का सबसे अधिक तापमान दर्ज होने से गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया गया।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की गतिविधि कमजोर रहने से किसानों और आम लोगों को बारिश का इंतजार करना पड़ सकता है। जिन इलाकों में हाल के दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां कृषि गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
बारिश कम होने से शहरों में जलभराव की समस्या फिलहाल कम हो सकती है। हालांकि तापमान बढ़ने के कारण उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
मोरनी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को भूस्खलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। मलबा हटाने और रास्तों की स्थिति सामान्य करने के लिए संबंधित विभाग निगरानी रख सकते हैं।
कालका-शिमला रेल मार्ग पहाड़ी क्षेत्र से गुजरता है और बारिश के दौरान यहां मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में ट्रैक की सुरक्षा और नियमित निरीक्षण जरूरी हो जाता है।
मौसम विभाग की ओर से सितंबर तक मानसून की कमजोर गतिविधि का अनुमान लगाए जाने के बाद अब लोगों की नजर आगामी मौसम परिवर्तन पर है। यदि किसी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर बारिश होती है तो उसका स्वरूप अलग हो सकता है।
हिसार में अधिक तापमान दर्ज होने के बाद दक्षिण और पश्चिमी हरियाणा के अन्य जिलों में भी गर्मी बढ़ने की संभावना बनी हुई है। दिन के समय धूप तेज रहने से लोगों को परेशानी हो सकती है।
किसानों के लिए भी बारिश की कमी चिंता का विषय बन सकती है। फसलों के लिए पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए कई क्षेत्रों में सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है।
प्रशासन और संबंधित विभाग मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए सड़क और रेल मार्गों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल हरियाणा में मानसून की गतिविधि कमजोर है। सितंबर तक बारिश के सीमित रहने के अनुमान के बीच मोरनी में लैंडस्लाइड और कालका-शिमला ट्रैक पर मलबा गिरने की घटना सामने आई है। वहीं, हिसार में अधिक तापमान के कारण गर्मी का असर बढ़ा है।
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