भिवानी : लेडी टीचर मनीषा की मौत के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो चर्चा में है। पश्चिम बंगाल के यूट्यूबर और खुद को पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर बताने वाले सूरज कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने मनीषा की कथित आत्मा से संपर्क किया। वीडियो में कथित तौर पर मिले जवाबों के आधार पर उन्होंने मनीषा की मौत को हत्या बताया है। हालांकि ऐसे कथित ‘स्पिरिट कम्युनिकेशन’ का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और वीडियो में किए गए दावों को जांच का तथ्य या साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
सूरज कुमार ने वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया कि करीब छह महीने से दर्शक उनसे मनीषा की आत्मा से संपर्क करने की मांग कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने कथित पैरानॉर्मल प्रक्रिया के जरिए सवाल पूछने का दावा किया।
वीडियो में यूट्यूबर की ओर से मौत के कारण और घटना में शामिल लोगों को लेकर सवाल किए गए हैं। वीडियो में कथित प्रतिक्रिया के रूप में मौत को हत्या बताया गया और चार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। परिवार को याद करने से जुड़ा जवाब भी वीडियो में दिखाया गया है।
इन दावों की किसी वैज्ञानिक या जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। खुद सूरज कुमार ने भी अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में डिस्क्लेमर देते हुए कहा है कि वीडियो पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन, मनोरंजन और रिसर्च के उद्देश्य से बनाया गया है तथा कथित स्पिरिट कम्युनिकेशन वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
मनीषा भिवानी जिले के ढाणी लक्ष्मण गांव की रहने वाली थी। वह 11 अगस्त 2025 को प्ले स्कूल में ड्यूटी के लिए घर से निकली थी। इसके बाद उसे नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन से संबंधित काम के लिए जाना था, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी।
दो दिन बाद 13 अगस्त 2025 को सिंघानी गांव के खेतों में उसका शव मिला था। घटना के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी और पुलिस ने भी शुरुआती स्तर पर हत्या से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
बाद में पुलिस की ओर से मौत को आत्महत्या बताए जाने पर परिवार और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। मामले को लेकर धरना-प्रदर्शन भी हुए। इसके बाद मनीषा के शव का दिल्ली एम्स में दोबारा चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और बढ़ते विवाद के बीच 26 अगस्त 2025 को मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।
CBI की स्पेशल क्राइम-II यूनिट ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने पंचकूला स्थित विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। एजेंसी की जांच का निष्कर्ष मौत को आत्महत्या से जोड़ता है।
मनीषा के पिता संजय इस निष्कर्ष से असहमति जता चुके हैं। उनका कहना रहा है कि परिवार इसे आत्महत्या नहीं मानता। ऐसे में परिवार की आशंका और जांच एजेंसी के निष्कर्ष के बीच अंतर बना हुआ है।
अब सोशल मीडिया पर सामने आए पैरानॉर्मल वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है, लेकिन वीडियो में किए गए कथित आत्मा से संपर्क और हत्या संबंधी दावों का कोई वैज्ञानिक या कानूनी प्रमाण सामने नहीं आया है। किसी आपराधिक मामले में ऐसे वीडियो को स्वतंत्र फॉरेंसिक या प्रत्यक्ष साक्ष्य का विकल्प नहीं माना जा सकता।
मनीषा की मौत से संबंधित आधिकारिक स्थिति जांच एजेंसी की रिपोर्ट, मेडिकल एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों और अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी। सोशल मीडिया पर वायरल पैरानॉर्मल दावे को प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
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