सोमवती अमावस्या पर नागक्षेत्र सरोवर बना आस्था का केंद्र

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Somvati Amavasya

श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व से जुड़े नागक्षेत्र सरोवर पर सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद, श्री नागक्षेत्र सुधार समिति, श्री कृष्ण कृपा परिवार, वरिष्ठ नागरिक मित्र मंडल तथा अन्य सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में यहां भव्य धार्मिक आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रभर से श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सुबह से ही नागक्षेत्र सरोवर पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पवित्र सरोवर में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाई और अपने पितरों का तर्पण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने पंडित संजीव गौतम के सानिध्य में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोचारण के बीच 5 कुंडीय हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की। हवन के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भक्तिरस में डूबते नजर आए। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने नागक्षेत्र तीर्थ की परिक्रमा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद के अध्यक्ष संजीव गौतम ने सोमवती अमावस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह अत्यंत दुर्लभ और विशेष संयोग है, जो लगभग 30 वर्षों के बाद बना है। उन्होंने कहा कि जब पुरुषोत्तम मास और ज्येष्ठ मास का संगम सोमवती अमावस्या के साथ होता है, तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इस दिन किए गए जप, तप, दान और स्नान का फल अनंत गुना प्राप्त होता है। विशेष रूप से पितरों के निमित्त जल अर्पित करने और उनका स्मरण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है। संजीव गौतम ने नागक्षेत्र सरोवर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह स्थल वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पर आयोजित इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और आध्यात्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा देते हैं। श्रद्धालुओं ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नागक्षेत्र सरोवर पर हर वर्ष इस तरह के आयोजन होने चाहिए, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी धार्मिक विरासत को समझ सके। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।

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