राजौरी में शहीद जवान सुखचैन सिंह की अंतिम विदाई में उमड़ा गांव, तिरंगा लेकर खड़े हुए बच्चे-महिलाएं; राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

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Sukhchain Singh

सिरसा : जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ निवासी सेना के जवान सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पैतृक गांव पहुंचा। जवान की अंतिम विदाई के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, महिलाएं, युवा और ग्रामीण हाथों में तिरंगा लेकर गांव के रास्तों पर खड़े दिखाई दिए।

पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही माहौल भावुक हो गया। लोगों ने ‘शहीद सुखचैन सिंह अमर रहें’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाकर जवान को श्रद्धांजलि दी। सेना और जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे। पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग गांव पहुंचे। कई युवा तिरंगा लेकर बाइक से पहुंचे। गांव के एंट्री पॉइंट से लेकर जवान के घर तक लोगों की भीड़ दिखाई दी।

सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी में 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट में थी। गुरुवार को राजौरी में ड्यूटी के दौरान उन्होंने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

सुखचैन सिंह की शादी वर्ष 2020 में हुई थी। परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और करीब पांच साल का बेटा है। सुखचैन सिंह जब करीब सात साल के थे, तभी उनके पिता बलविंद्र सिंह का निधन हो गया था। उनकी माता का नाम अमर कौर है। परिवार में उनके दो भाई और एक बहन भी हैं।

जवान का पार्थिव शरीर राजौरी से पहले पठानकोट लाया गया था। शुक्रवार को इसे हवाई मार्ग से सिरसा पहुंचाने की योजना थी, लेकिन खराब मौसम के कारण आगे की यात्रा प्रभावित हुई। इसके बाद पार्थिव शरीर को सड़क मार्ग से सिरसा लाया गया और शुक्रवार रात करीब 11 बजे सिरसा एयरफोर्स स्टेशन में रखा गया।

शनिवार सुबह पार्थिव शरीर को वहां से पैतृक गांव कुत्ताबढ़ के लिए रवाना किया गया। रास्ते में भी विभिन्न स्थानों पर लोग जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद रहे। अंतिम यात्रा के रूट पर पुलिस बल की तैनाती की गई और प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं संभाली गईं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सुखचैन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजौरी में देश की रक्षा करते हुए सुखचैन सिंह ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया और देश के प्रति अपनी निष्ठा व साहस का परिचय दिया।

सुखचैन सिंह की अंतिम विदाई के दौरान गांव में देशभक्ति और शोक का माहौल एक साथ दिखाई दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा और फूल-मालाएं लेकर पहुंचे। ग्रामीणों ने जवान के बलिदान को याद करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

करीब 11 वर्ष तक सेना में सेवा देने वाले सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ उनके प्रति लोगों के सम्मान को दर्शाती रही। गांव कुत्ताबढ़ में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

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