हिसार में ₹1.80 करोड़ का फुटओवर ब्रिज 13 साल बाद हटना शुरू, इस्तेमाल नहीं होने पर नीलामी; सड़क बनेगी सिक्सलेन

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Hisar Foot Over Bridge

हिसार : बस स्टैंड के पास करीब 13 साल पहले 1.80 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया फुटओवर ब्रिज अब हटाया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने और बस स्टैंड क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से बनाए गए इस ब्रिज का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हो सका। सरकार ने इसे नीलाम कर हटाने का फैसला लिया है। ब्रिज हटने के बाद तुलसी चौक से गुरुद्वारे तक सड़क को सिक्सलेन करने की योजना है।

फुटओवर ब्रिज का निर्माण तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हुआ था। नवंबर 2013 में तत्कालीन हिसार विधायक सावित्री जिंदल ने बस स्टैंड के पास तलाकी गेट क्षेत्र में इसकी नींव रखी थी। उस समय परियोजना पर करीब 1.80 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

ब्रिज में करीब 25 मीटर लंबा मुख्य फुटपाथ बनाया गया था, जबकि दोनों तरफ करीब 60-60 मीटर लंबी सीढ़ियों की व्यवस्था की गई थी। उद्देश्य था कि पैदल यात्री सड़क पर सीधे ट्रैफिक के बीच से गुजरने के बजाय फुटओवर ब्रिज का इस्तेमाल करें। हालांकि निर्माण के बाद लोगों ने इसका अपेक्षित उपयोग नहीं किया।

ब्रिज का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए बाद में एस्केलेटर लगाने की योजना भी बनाई गई। वर्ष 2018 में करीब 1.98 करोड़ रुपए की लागत से स्वचालित सीढ़ियां लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। वर्ष 2019 में एस्केलेटर से संबंधित सामान भी मौके पर पहुंच गया, लेकिन आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे लगाया नहीं जा सका।

बताया गया है कि एस्केलेटर का सामान करीब छह साल तक मौके पर पड़ा रहा। बाद में संबंधित कंपनी इसे वापस ले गई और फुटओवर ब्रिज को अधिक उपयोगी बनाने की योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।

ब्रिज को हटाने की दिशा में नवंबर 2025 में महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। 17 नवंबर 2025 को हुई समीक्षा बैठक में PWD मंत्री रणबीर गंगवा ने इस परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए इसे हटाने और नीलाम करने के निर्देश दिए थे। बैठक में विधायक सावित्री जिंदल भी मौजूद थीं।

इसके बाद डायरेक्टरेट ऑफ सप्लाई एंड डिस्पोजल (DS&D) विभाग के माध्यम से नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई। अब PWD मैकेनिकल विभाग की देखरेख में ब्रिज को हटाने का काम शुरू हो गया है। इसकी सीढ़ियों को हटाया जा चुका है। विभाग की ओर से नीलामी में प्राप्त राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।

ब्रिज हटने के बाद तुलसी चौक से गुरुद्वारे तक सड़क को सिक्सलेन करने की योजना है। इससे बस स्टैंड के आसपास सड़क के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध होने और यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने परियोजना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आवश्यकता और पर्याप्त अध्ययन के बिना तैयार किए गए प्रोजेक्ट सफल नहीं होते। उन्होंने फुटओवर ब्रिज के अपेक्षित उपयोग में नहीं आने को परियोजना की योजना से जोड़कर देखा।

इस परियोजना से एक राजनीतिक संयोग भी जुड़ा है। वर्ष 2013 में ब्रिज के निर्माण के समय सावित्री जिंदल कांग्रेस की विधायक थीं। अब ब्रिज हटाए जाने के समय भी वह हिसार की विधायक हैं, हालांकि 2024 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीता था।

फुटओवर ब्रिज को हटाने के साथ अब शहर की नजर सड़क के प्रस्तावित सिक्सलेन प्रोजेक्ट पर रहेगी। इसके पूरा होने के बाद बस स्टैंड और आसपास के व्यस्त क्षेत्र में ट्रैफिक व्यवस्था में कितना सुधार होता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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