यमुनानगर : खारवन चौक स्थित क्रेन कार्यालय में हुई फायरिंग में मंधार गांव निवासी रिषपाल सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। वारदात को अंजाम देने वाले हमलावरों की पहचान और उनके आने-जाने का रूट पता लगाने के लिए अब तक 60 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। पुलिस मुसिंबल क्षेत्र में सरपंच के घर हुई फायरिंग से भी इस वारदात का संभावित कनेक्शन तलाश रही है।
दोनों घटनाओं में बाइक सवार तीन-तीन युवकों के शामिल होने और उनके हुलिए में कथित समानता सामने आने के बाद पुलिस इस पहलू पर जांच कर रही है कि कहीं दोनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह तो नहीं है। हालांकि अभी पुलिस ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
खारवन चौक स्थित क्रेन कार्यालय में हुई फायरिंग के दौरान रिषपाल सिंह को गोली लगी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में उनके साथ मौजूद कमलजीत सिंह और गुरलीन सिंह भी घायल हुए थे। वारदात के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों से सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जुटानी शुरू कर दी थी।
जांच टीम अब केवल घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमलावर वारदात से पहले किस रास्ते से खारवन चौक पहुंचे और फायरिंग के बाद किस दिशा में फरार हुए।
इसके लिए आसपास के पेट्रोल पंप, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और प्रमुख रास्तों पर लगे कैमरों की फुटेज देखी जा रही है। अलग-अलग स्थानों से मिली रिकॉर्डिंग को जोड़कर संदिग्ध बाइक का पूरा रूट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस बाइक के नंबर के अलावा संदिग्धों के कपड़े, हेलमेट और अन्य पहचान योग्य संकेतों पर भी ध्यान दे रही है। अब तक 60 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है, लेकिन हमलावरों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू मुसिंबल क्षेत्र में सरपंच के घर हुई फायरिंग भी है। दोनों वारदातों में बाइक पर तीन युवकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उनके हुलिए और घटनाओं के तरीके में संभावित समानताओं की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने से पहले दोनों मामलों को एक ही गिरोह से जोड़कर देखना फिलहाल एक जांच बिंदु है।
रिषपाल हत्याकांड में पुराने विवादों की भी जांच की जा रही है। पुलिस के सामने वर्ष 2020 से बाल छप्पर गांव के दो पक्षों के बीच चली आ रही कथित रंजिश से जुड़ी जानकारी भी आई है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि पुराने घटनाक्रम और मौजूदा हत्या के बीच कोई संबंध है या नहीं।
पुराने मामलों में सामने आए नामों, संदिग्धों के संपर्कों और हाल के वर्षों में उनकी गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस का प्रयास केवल वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि हमले के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।
यह भी पता लगाया जा रहा है कि हमलावरों को रिषपाल की मौजूदगी या गतिविधियों के बारे में जानकारी कैसे मिली और वारदात के बाद फरार होने में किसी ने उनकी मदद की या नहीं। इन पहलुओं की पुष्टि के लिए तकनीकी और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
मामले के बीच पुलिस विभाग में दो कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम और संबंधित स्तर पर हुई संभावित चूक की अलग-अलग जांच कर रहा है।
फिलहाल हमलावर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। सीसीटीवी फुटेज, पुराने विवादों, संदिग्धों के संपर्कों और दोनों फायरिंग की घटनाओं से जुड़े तथ्यों को मिलाकर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जांच के बाद ही हत्या के पीछे की वास्तविक वजह और दूसरी फायरिंग से किसी संभावित संबंध की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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