भिवानी जिले में जर्जर और खस्ताहाल स्कूल भवनों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने सभी संबंधित अधिकारियों को ऐसे भवनों में विद्यार्थियों की कक्षाएं नहीं लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बेहद खराब स्थिति वाली इमारतों को डिमॉलिश करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पुराने और कमजोर भवनों में कक्षाएं संचालित होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ऐसे में विभाग ने स्कूल स्तर पर भवनों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
DEO ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण करें। जिन भवनों या कमरों की हालत बेहद खराब है, उन्हें चिन्हित कर वहां पढ़ाई तत्काल बंद कराई जाए।
जर्जर भवनों की पहचान के बाद उनकी स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि किसी भवन को उपयोग के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो उसे विद्यार्थियों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मुख्य जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान किसी तरह का जोखिम न उठाना पड़े। स्कूल भवन में दीवारों, छत, फर्श या अन्य हिस्सों की स्थिति खराब होने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
जहां किसी स्कूल की इमारत का कुछ हिस्सा ही खराब है, वहां सुरक्षित कमरों में कक्षाएं लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को वैकल्पिक कक्ष या अन्य सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, पूरी तरह खस्ताहाल और असुरक्षित भवनों को डिमॉलिश करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
निर्देशों के बाद BEO स्तर पर स्कूलों की स्थिति की जानकारी जुटाने का काम तेज किया जा सकता है। स्कूल प्रबंधन से भी भवन की स्थिति और विद्यार्थियों की संख्या से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के लिए भी भवन सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसी हादसे की संभावना को देखते हुए जर्जर इमारतों को खाली कराना जरूरी माना जाता है।
शिक्षा विभाग की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भवनों की स्थिति को लेकर किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। यदि किसी असुरक्षित भवन में पढ़ाई जारी रहती है तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है।
जर्जर भवनों को हटाने के बाद वहां नई इमारत या सुरक्षित कक्ष उपलब्ध कराने की जरूरत भी होगी। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग की प्राथमिकता रहेगी।
भवनों की जांच के दौरान स्थानीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकती है। इससे यह तय करने में आसानी होगी कि कौन-सा भवन मरम्मत के योग्य है और किसे गिराना जरूरी है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में भवनों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए निरीक्षण के बाद प्रत्येक स्कूल के लिए जरूरत के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
DEO के निर्देशों के बाद अब BEO और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए असुरक्षित स्थानों पर कक्षाएं नहीं लगानी होंगी।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि स्कूलों में जर्जर भवनों से जुड़े जोखिम को कम किया जा सकेगा। साथ ही लंबे समय से मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा कर रही इमारतों पर भी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल भिवानी में शिक्षा विभाग ने खस्ताहाल स्कूल भवनों में पढ़ाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बेहद जर्जर इमारतों को डिमॉलिश करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। अब BEO की रिपोर्ट और निरीक्षण के आधार पर अगली कार्रवाई तय होगी।
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